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उधार के पैसे कैसे वापस लें: ग्राहक को बुरा माने बिना

InventryBook टीम ·

उधार बुरा नहीं, बिना हिसाब का उधार बुरा है

मोहल्ले की दुकान उधार के भरोसे ही चलती है। परेशानी तब होती है जब याद नहीं रहता कि किसका कितना है और कब से। ग्राहक कहता है "इतना तो नहीं था", और आपके पास सिर्फ़ डायरी का एक पन्ना होता है।

नीचे के पाँच तरीके उधार बंद करने के लिए नहीं, उसे संभालने के लिए हैं।

1. हर उधार उसी समय लिखें, तारीख़ के साथ

सामान देते ही लिखें: तारीख़, क्या दिया, कितने का। शाम को याद करके लिखा हिसाब ही झगड़े की जड़ है। जब पैसा मिले, वह भी उसी समय लिखें।

2. हर ग्राहक की एक सीमा तय करें

मन में ही सही, हर ग्राहक की हद तय करें। उदाहरण: रमेश जी हर महीने की 7 तारीख़ को तनख़्वाह आने पर चुकाते हैं और महीने में लगभग ₹3,000 का सामान लेते हैं। तो ₹4,000 उनकी सीमा है। इससे आगे जाए तो नया उधार देने से पहले विनम्रता से बात करें।

3. पुराना उधार पहले देखें

₹500 का 10 दिन पुराना उधार और ₹500 का 90 दिन पुराना उधार एक जैसे नहीं हैं। जितना पुराना, उतना मुश्किल वसूलना। हर हफ़्ते यह देखें कि किसका उधार 30 दिन से पुराना है, और पहले उनसे बात करें।

4. माँगने के बजाय हिसाब भेजें

"पैसे दीजिए" कहना अजीब लगता है, पर हिसाब भेजना नहीं। एक सादा संदेश:

नमस्ते रमेश जी, शर्मा किराना से। आपका अब तक का हिसाब ₹2,640 है। सुविधा से दे दीजिए, UPI से भी चलेगा। धन्यवाद!

तारीख़वार पूरा हिसाब साथ हो तो ग्राहक खुद मिला सकता है, और बहस की जगह नहीं रहती।

5. आंशिक भुगतान लें, और लिखें

पूरा नहीं तो आधा ही सही। हर जमा लिखें और बाकी उसी समय बताएं: "₹1,000 मिले, अब बाकी ₹1,640।"

फ़ोन पर यह कैसे होता है

InventryBook में बिल बनाते समय भुगतान में "उधार" चुनें, तो रकम उस ग्राहक के खाते में अपने आप जुड़ जाती है। ग्राहक पेज पर हर ग्राहक का बाकी दिखता है, और साथ में यह भी कि उधार कितना पुराना है (0–30, 31–60, 61–90 और 90 दिन से ज़्यादा) और सबसे ज़्यादा किस पर बाकी है। मासिक बिल के पेज से एक टैप में ग्राहक को उसके महीने का हिसाब WhatsApp पर लिंक के रूप में जाता है। किराना दुकान के लिए देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ग्राहक मना करे कि इतना उधार था? तारीख़वार सूची दिखाएं। इसीलिए हर उधार उसी समय लिखना ज़रूरी है।

कितने दिन बाद याद दिलाएं? जो ग्राहक तनख़्वाह पर चुकाते हैं, उन्हें उसी हफ़्ते। बाकी को 30 दिन पर।

क्या उधार पर ब्याज लेना ठीक है? ज़्यादातर मोहल्ले की दुकानें नहीं लेतीं; सीमा तय करना ज़्यादा काम का है।

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